Friday, 23 April 2021

Saturday, 23 January 2021

Celebration of 125th Birth Anniversary of Neta ji Subhash Chandra Bose from 23 Jan. 2021 to 3 Feb. 2021





About Neta ji:- सुभाष चन्द्र बोस (बांग्ला: शुभाष चॉन्द्रो बोशु, जन्म: 23 जनवरी 1897, मृत्यु: 18 अगस्त 1945) भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिंद का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा" का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया।भारतवासी उन्हें नेता जी के नाम से सम्बोधित करते हैं।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से सहायता लेने का प्रयास किया था, तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें खत्म करने का आदेश दिया था।[3]

नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इंफाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।

21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आज़ाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनीजापानफिलीपींसकोरियाचीनइटलीमान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशो की सरकारों ने मान्यता दी थी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया।

1944 को आज़ाद हिंद फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।

6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं।[4]

नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है।[5] जहाँ जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका शहीद दिवस धूमधाम से मनाया जाता है वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे। यदि ऐसा नहीं है तो भारत सरकार ने उनकी मृत्यु से संबंधित (सम्बन्धित) दस्तावेज अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किये?(यथा संभव (सम्भव) नेता जी की मौत नही हुई थी) [6]

16 जनवरी 2014 (गुरुवार) को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नेता जी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये विशेष पीठ के गठन का आदेश दिया।[7]

आज़ाद हिंद सरकार के ७५ वर्ष पूर्ण होने पर इतिहास मे पहली बार वर्ष २०१८ में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया। २३ जनवरी २०२१ को नेताजी की १२५वीं जयंती है जिसे भारत सरकार ने पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।








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Thursday, 26 November 2020


Welcome to Kendriya Vidyalaya Deogarh (Raj.)

Celebration of Indian Constitution Day ,

 26 Nov. 2020
Read the constitution PREAMBLE and get your certificate



Quiz on Indian Constitution Day by K.V.Deogarh Library 

Tuesday, 15 September 2020

हिंदी पखवाडा के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताये




अभिनंदन हिन्दी 

माणिक,मोती,कंचन  हिन्दी .
तिलक राष्ट्र का चंदन हिन्दी .

अपनो  से भी अपनी लगती ,
रेशम  सा एक  बंधन  हिन्दी .

श्रेष्ठ , सरल ,सुंदर, संस्कारी , 
मिश्री  सा  सम्बोधन  हिन्दी .

भाषाओं  के  वन-उपवन मे ,
सरस  और  सम्मोहन हिन्दी .

विश्व  चेतना  बन  मुस्काती ,
हृदय  से  अभिनंदन  हिन्दी .

 हिन्दी
 दिवस की शुभकामनाएं

Friday, 28 August 2020

Wednesday, 5 August 2020

Library Quiz






लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की १०० वी पुण्यतिथि पर केंद्रीय विद्यालय देवगढ, पुस्तकालय द्वारा आयोजित प्रश्नोत्तरी ----quiz on Teacher's Day